ब्रिटिश संसद लंदन में आरडीपीएस डायरेक्टर रितु खण्डेलवाल सम्मानित

बैतूल शहर

दुनियां की नंबर 1 युनिवर्सिटी ने किया था कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित

बैतूल। आदिवासी अंचल में बसे बैतूल जिले के बच्चों को शिक्षा के हर उस पायदान पर खरा उतारकर आरडी पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर रितु खण्डेलवाल ने यह साबित कर ही दिया कि प्रतिभा चाहे पिछड़े अंचल की हो या फिर सर्व सुविधा युक्त एवं हाईटेक शहरों की, यदि सही समय पर अवसर मिले तो उन्हें मुखर होने से कोई नहीं रोक सकता। उनकी अथक मेहनत, अनुशासन, बेहतर शिक्षा पद्धति एवं अपनी शैक्षणिक संस्था आरडीपीएस की हर प्रतिभा को अवसर, मंच और प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की उनकी खूबियों ने कम समय में ही स्कूल ने इंटरनेशल ख्याति अर्जित की है। हाल ही में शिक्षा के क्षेत्र में दुनियां की नंबर-1 इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन यूनिवर्सिटी के आमंत्रण पर यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में आयोजित कान्फ्र्रेंस में आरडीपीएस डायरेक्टर श्रीमती खण्डेलवाल ने शामिल होकर नया आयाम हासिल किया है।

चुनिंदा शैक्षणिक संस्थाओं के संचालकों को किया था आमंत्रित

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में आयोजित कॉनफे्रंस में देश की चुनिंदा शैक्षणिक संस्थाओं के डायरेक्टर एवं प्राचार्यों को आमंत्रित किया गया था। बैतूल जैसे पिछड़े एवं आदिवासी जिले में संचालित निजी शैक्षणिक संस्थान की संचालक को इस कॉन्फ्रे्रंस में आमंत्रित किया जाना पूरे जिले का गौरव है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए नवाचारों एवं आरडीपीएस स्कूल में बच्चों के शैक्षणिक स्तर के अलावा सामाजिक सरोकारों को देखते हुए श्रीमती रितु खण्डेलवाल को मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट हाऊस ऑफ कॉमन्स वीरेन्द्र शर्मा एवं लेबर पार्टी यूके के सांसद द्वारा ब्रिटिश संसद के जुबली सभागृह में सम्मानित किया गया।

यूके में 7 फीसदी बच्चे ही करते है निजी स्कूलों में अध्ययन

चार दिवसीय कॉन्फ्रेस में शिरकत कर वापस लौटी श्रीमती खण्डेलवाल ने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि इन चार दिनों में उन्हें विख्यात शिक्षाविदों एवं नामी हस्तियों को सुनने का अवसर मिला। जॉली फोनिटिक्स के अविष्कार क्रिष जॉली, यूके के शिक्षा मंत्री के वरिष्ठ सलाहकार प्रोफेसर डेविड वुड्स, नेतृत्व के क्षेत्र में शोधकर्ता मैक्स कोट्स, चेयर मेन ऑफ एजूकेशन लीडरशिप पीटर ईयरली जैसे प्रख्यात वक्ताओं के मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। ब्रिटेन की शिक्षा प्रणाली को समझने के लिए वहां के स्कूलो को निरीक्षण करने का अवसर भी उन्हें मिला। श्रीमती रितु ने बताया कि स्कूलों की विजिट के दौरान वे यह जानकर आश्चर्यचकित रह गई कि यूके में महज 7 प्रतिशत विद्यार्थी ही निजी स्कूलों में शिक्षा अध्ययन करते है, बाकी विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में ही अध्ययन करते है। यहां पालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बावजूद भी लोग बच्चों को निजी की बजाय सरकारी स्कूलों में अध्यापन कराते है, जो यहां की बेहतर शिक्षा व्यवस्था का ही परिणाम है। श्रीमती खण्डेलवाल ने बताया कि यहां शिक्षक शिक्षिकाओं का शिक्षा के प्रति समर्पित भाव तारीफे काबिल है। श्रीमती खण्डेलवाल ने बताया कि चार दिनों में कॉन्फेंस में जो अनुभव उनके द्वारा प्राप्त किए उनका लाभ आरडीपीएस संस्थान को भी मिलेगा। उन्होंने यूके आधारित शिक्षा पद्धति अपने विद्यालय में भी लागू करने की बात कहीं है ताकि यहां अध्ययनरत बच्चों को और अधिक बेहतर शिक्षा मिल सकें।