BETUL: रेत ठेकेदार ने किया एनजीटी एक्ट का उल्लंघन, अवैध परिवहन के लिए तवा नदी के बीच बना दिया कच्चा पुल

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बैतूल। जिले में रेत ठेकेदार द्वारा शासन की अनदेखी का भरपूर लाभ उठाते हुए भारी मात्रा में अवैध उत्खनन कर प्राकृतिक संपदा का दोहन किया जा रहा है। शिवा कार्पाेरेशन रेत कंपनी के हौसले इस हद तक बुलंद है कि इन्होंने नदी के उस पार से रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के लिए बगैर अनुमति गैर कानूनी तरीके से तवा नदी का रास्ता रोक एक पुल का निर्माण कर दिया है।
शिवा कार्पोरेशन रेत कंपनी द्वारा एनजीटी की रोक होते हुए भी शाहपुर के डोडरामुआर गांव में नियम विरूद्ध तवा नदी पर पुल का अवैध रेत परिवहन के लिए निर्माण किया है। नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल एक्ट 2010 के अनुसार किसी भी नदी की धारा को रोक कर पुल निर्माण नही किया जा सकता।
बताया जा रहा है कि शाहपुर ब्लाक के डोडरामुआर गुरगुन्दा और रेलवे फाटक के बीच मे पुल के बगल से अंदर गांव तरफ जाने की रास्ता के बाद स्थित तवा नदी पर शिवा कारपोरेशन द्वारा बगैर परमिशन के पुल बनाकर अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है जबकि इनकी स्वीकृत खदान इस स्थान से लगभग 15 किमी दूर गुवाड़ी में स्थित है बावजूद इसके रेत का अवैध खनन एवं परिवहन के लिए नदी के बीचो बीच रेत मिट्टी का पुल निर्माण कर लिया गया है जिससे इनके रेत परिवहन करने वाले वाहन डंपर, ट्रक ट्रेक्टर आदि आसानी से नदी पार हो सके। जानकारो का कहना है कि यह पर्यावरण को क्षति है इस प्रकार कच्चे मटेरियल रेत, मिट्टी एवं पत्थरो से पुल निर्माण किये जाने से जल बहाव का रास्ता सकरा हो गया है। समय रहते यदि प्रशासन सचेत नहीं हुआ तो भविष्य में भीषण बाढ़ एवं कच्चे पुल पर कोई गंभीर दुर्घटना संभावित है।

क्या है एनजीटी एक्ट 2010?
पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार को लागू करने और क्षति के लिए राहत और क्षतिपूर्ति सहित वन, नदी, पहाड़ सहित अन्य प्राकृतिक संसाधनों के पर्यावरण संरक्षण और संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की स्थापना 2010 में की गई है जिसके तहत कानून बनाया गया है जो एनजीटी एक्ट 2010 कहलाता है। जिसका उल्लंघन करने पर जुर्माना एवं सजा का प्रावधान है।

धारा-27, कंपनियों द्वारा अपराध
(1) इस अधिनियम के तहत किसी भी अपराध एक कंपनी द्वारा किया गया है जिसमें हर व्यक्ति, जो इस अपराध के समय में या आरोप में था, और कंपनी के कारोबार के संचालन के लिए कंपनी के लिए जिम्मेदार था साथ ही कंपनी के रूप में, अपराध का दोषी समझा जाएगा और के खिलाफ और तदनुसार दंडित किया जा सकता है।
(2) उप – धारा में किसी बात के होते हुए भी (1), जहां इस अधिनियम के तहत अपराध कंपनी द्वारा किया गया है और यह अपराध की सहमति या मिलीभगत के साथ प्रतिबद्ध किया गया है कि साबित हो गया है, या इस तरह के निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी का हिस्सा भी है कि अपराध का दोषी समझा जाएगा और के खिलाफ और तदनुसार दंडित किए जाने का प्रावधान है।

इनका कहना-
मैं अभी चार-पांच दिनो के लिए जिले से बाहर हॅू बैतूल पहुंचकर मामले को दिखवाता हॅू।
ज्ञानेश तिवारी, जिला खनिज अधिकारी, बैतूल