MP: मप्र के मजदूरों के ऊपर से गुजरी मालगाड़ी, 14 की मौत, 5 घायल

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बैतूल जिले के कुछ मजदूर होने का अंदेशा, नोडल अधिकारी बीएल विश्नोई से नहीं मिल पा रही जानकारी

औरंगाबाद-महाराष्ट्र में आज (शुक्रवार) सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया. 16 प्रवासी मजदूर एक ट्रेन की चपेट में आ गए. घटना मुंबई से 360 किलोमीटर दूर औरंगाबाद जिला स्थित करमाड की है. सभी मजदूर पटरी के सहारे जालना से भुसावल की ओर पैदल अपने घर (मध्य प्रदेश) लौट रहे थे. जिसमें से कुछ मजदूर बैतूल जिले के होने का भी अंदेशा जताया जा रहा है। सभी मजदूर अत्यधिक थकान की वजह से पटरी पर ही लेट गए. सुबह सवा पांच बजे एक ट्रेन वहां से गुजरी. मजदूरों को संभलने का भी मौका नहीं मिला और सभी ट्रेन की चपेट में आ गए. रेलवे के अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की है. रेलवे ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं. पुलिस और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के अफसर मौके पर पहुंच गए हैं. अभी तक मजदूरों की शिनाख्त नहीं हो सकी है. बताया जा रहा है कि हादसा बेहद दर्दनाक था. घटना के समय इलाके में चीख-पुकार मच गई. मिली जानकारी के अनुसार, मजदूरों को ट्रैक पर देखने के बाद लोको पायलट ने मालगाड़ी को रोकने की काफी कोशिश की लेकिन फिर भी सही समय पर ट्रेन नहीं रुक पाई. हादसे का शिकार हुए 14 मजदूरों की मौत हो चुकी है. 5 लोग घायल हैं. औरंगाबाद के सरकारी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.

बैतूल के नोडल अधिकारी बी.एल. विश्नोई बचा रहे पल्ला-

बैतूल जिले से विभिन्न प्रदेशों में काम के लिए गये प्रवासी मजदूरो की वापसी के लिए अलग-अलग प्रदेशो के नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। जिसमें महाराष्ट्र के लिए बी.एल. विश्नोई, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को कार्यभार दिया गया था। किंतु श्री विश्नोई के पास कोई रिकार्ड ही नहीं है और न ही कोविड-19 की जिम्मेदारी निभाने की क्षमता। इनका गैर जिम्मेदाराना रवैया कुछ इस तरह है कि किसी रूप में इनसे संपर्क नहीं किया जा सकता, लोगो का फोन ये उठाते नहीं है। यदि कार्यालय में जाकर कोई इनसे मिलना चाहे तो ये अपने आप को कैबिन में बंद करके बैठे रहते है और किसी से नहीं मिलते। इनका कहना यह है कि अभी लॉकडाउन है मैं किसी से नहीं मिल सकता। जबकि कलेक्टर बैतूल द्वारा कोविड-19 की इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ऐसे अधिकारी को दी है जो पब्लिक से हर तरह से दूर है। सर्वे के अनुसार कोविड-19 के संक्रमण के मामले में महाराष्ट्र की स्थिति गंभीर है। गैर जिम्मेदार अधिकारी को जिम्मेदारी भरा कार्य सौपने पर वह जिलाधिकारी के लिए मुसिबत का कारण बन सकता है। उक्त घटना के संबंध में जब महाराष्ट्र के मजदूरो को बैतूल जिले में लाने हेतु संपर्क अधिकारी श्री विश्नोई से दूरभाष पर संपर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद जिला कलेक्टर से चर्चा की गई कि कितने मजदूर बैतूल जिले के महाराष्ट्र में है और उन्हें वापस लाने हेतु कितने आवेदन आए है तथा उनका नाम व पता की जानकारी नोडल अधिकारी श्री विश्नोई से पूछने हेतु उनसे संपर्क का हर संभव प्रयत्न करना चाहा किंतु वे अपने उत्तरदायित्व से बचने का प्रयास करते नजर आ रहे है। जिला कलेक्टर ने कहा कि मैं पता करके बताता हॅू । कई राज्यों ने अपने-अपने राज्यों के मजदूरों व कामगारों को वापस लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं. यह ट्रेनें अन्य राज्यों में फंसे हुए लोगों को उनके राज्य पहुंचा रही हैं. इसके बावजूद लोगों के अपने राज्य पैदल जाने का सिलसिला नहीं थम रहा है. काफी संख्या में लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर पैदल भी अपने राज्य लौट रहे हैं. जिसमें मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में नियुक्त नोडल अधिकारी जैसे लोगो की वजह से ही मजदूरो को अपनी जान तक गवानी पड़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर दुख जताया है. पीएम ने ट्वीट किया, महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल हादसे में जानमाल के नुकसान से बेहद दुखी हूं. रेल मंत्री पीयूष गोयल से बात कर चुका हूं और वह स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं. हर संभव मदद दी जा रही है.