रंगपंचमी : भगवान अपने भक्तों के साथ खेलते हैं रंग

धर्म-कर्म

अनिष्टकारी शक्तियों पर विजय पाने का पर्व

TV24INDIANEWS DESK. चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इसी के चलते इसको ये नाम मिला है। इस बार ये त्यौहार 25 मार्च को पड़ रहा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन आसमान में रंग उड़ाने से रज और तम के प्रभाव कम हो कर उत्सव का सात्विक स्वरूप निखरता है और देवी-देवता भी प्रसन्न होते हैं। 

रंगपंचमी के साथ होती है होली उत्सव की समाप्ती

  1. रंगों कर वर्षा करके भगवान देते हैं आशीर्वादये भी कहा जाता है कि आसमान से ही रंगों के जरिए भगवान भी अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। उत्तर भारत में जितनी धूमधाम से होली मनाई जाती है, उतने ही उत्साह से रंग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है।
  2. प्राचीनकाल से ही होती है रंगपंचमीइस पर्व का इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में जब होली का उत्सव कई दिनों तक मनाया जाता था उस समय रंगपंचमी के साथ उसकी समाप्ति होती थी और उसके बाद कोई रंग नहीं खेलता था।
    • वास्तव में रंग पंचमी होली का ही एक रूप है जो चैत्र मास की कृष्ण पंचमी को मनाया जाता है। होली का आरंभ फाल्गुन माह के साथ हो जाता है और फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के बाद यह उत्सव चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से लेकर रंग पंचमी तक चलता है। 
    • देश के कई हिस्सों में इस अवसर पर धार्मिक और सांकृतिक उत्सव आयोजित किये जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार रंग पंचमी अनिष्टकारी शक्तियों पर विजय पाने का पर्व कहा जाता है।