गणेश चतुर्थी व्रत गणेशजी को चढ़ाएं दूर्वा, इस मंत्र का करें जाप

धर्म-कर्म

TV24INDIANEWS DESK. रविवार, 24 मार्च को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है। इस तिथि पर गणेश चतुर्थी व्रत किया जाता है। जो लोग ये व्रत करते हैं, वे इस दिन चंद्र दर्शन करते हैं और पूजा के बाद भोजन ग्रहण करते हैं। रविवार को चंद्र उदय रात 10 के बाद होगा। ेज्योतिषाचार्य े अनुसार इस दिन सुख-समृद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा के साथ ही उनके 12 नाम मंत्रों का जाप भी करना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। जानिए गणेशजी की पूजा की सरल विधि और 12 नाम मंत्र…
 

पूजन विधि व मंत्र

  1. ये है गणेशजी की सरल पूजा विधिगणेश चतुर्थी की सुबह जल्दी उठें, स्नान के बाद सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
    • इसके बाद भगवान श्रीगणेश को जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं। पूजा का धागा अर्पित करें। चावल चढ़ाएं।
    • गणेश मंत्र बोलते हुए दूर्वा की 21 गांठ चढ़ाएं। 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। कर्पूर से भगवान श्रीगणेश की आरती करें।
    • पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांट दें। अगर संभव हो सके तो घर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दक्षिणा दें।
    • गणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले व्यक्ति को शाम को चंद्र दर्शन करना चाहिए, पूजा करनी चाहिए। इसके बाद ही भोजन करना चाहिए।
  2. पूजा में बोलें गणेशजी के 12 नाम वाला मंत्रगणेशजी को दूर्वा की 11 या 21 गांठ चढ़ाएं और दूर्वा चढ़ाते समय इन मंत्रों का जाप करें। ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम: 
    • इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। मान्याता है कि इस तरह पूजा करने से भगवान श्रीगणेश प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं।