ससुर को सदमा न लगे इसलिए शहीद की पत्नी ने रातभर नहीं मिटाया सिंदूर

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जयपुर। गुरुवार को जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में राजस्थान के भी पांच जवान शहीद हो गए। शहीदों में कोटा के हेमराज मीणा, जयपुर के शाहपुरा के रोहिताश लांबा, धौलपुर के भागीरथ सिंह, भरतपुर के जीतराम गुर्जर और राजसमन्द नारायण गुर्जर शामिल हैं। पुलवामा के अवंतीपोरा में राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर विस्‍फोटकों से भरी गाड़ी को सीआरपीएफ की बस से भिड़ा दिया गया। बस में कुल 44 जवान सवार थे। जैश-ए-मोहम्‍मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और इस आत्मघाती आतंकी हमले को आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया।

शहीद रोहिताश लांबा गांव गोविंदपुरा बांसड़ी के रहने वाले थे। साल भर पहले ही उनकी शादी हुई थी। उनकी तीन महीने की बेटी भी है। बच्ची को देखने के लिए रोहिताश होली पर घर आने वाले थे, लेकिन इसके पहले ही पुलवामा में हुए आतंकी हमले में वो शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर सुनकर पूरे गांव में शोक का माहौल है।

सीआरपीएफ की 61वीं बटालियन के हेमराज मीणा कोटा जिले के सांगोद के विनोद कलां गांव के रहने वाले थे। सीआरपीएफ के जम्मू कैम्प से रात 10 बजे के आसपास उनकी पत्नी मधु के पास कॉल आया जिसमें शहीद होने की सूचना दी गई। मधु ने शहीद के बुजुर्ग पिता को सदमा न लग जाए इसलिए रात भर सिंदूर नहीं मिटाया। इसकी जानकरी बड़े भाई रामविलास मीणा को पहले दी।

भरतपुर नगर क्षेत्र के गांव सुन्दरावली के रहने वाले जवान जीतराम घर से दो दिन पहले ही पुलवामा गए थे। शहीद जीतराम ने 2010 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। उसकी शादी करीब 5 साल पूर्व हुई थी और घर में कमाने वाला वह अकेला था लेकिन उसके शहीद होने के बाद आज घर में कमाने वाला फिलहाल कोई नहीं है।

धौलपुर जिले के राजाखेड़ा क्षेत्र का रहने वाला शहीद भागीरथ सिंह 6 साल पहले ही सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन में भर्ती हुआ था। 1 महीने से छुट्टी पर गांव आए थे और दो दिन पहले ही सोमवार को अपने गांव से ड्यूटी के लिए गए थे, तभी ड्यूटी पर जाने के दौरान हुए आतंकी हमले में वे शहीद हो गए।

राजसमंद के बिनोल गांव के निवासी शहीद नारायण गुर्जर 12 फरवरी को ही वह ड्यूटी पर लौटे थे। वे सीआरपीएफ की 118 बटालियन के जवान थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। वे हंसमुख स्वभाव और मिलनसार होने के कारण गांव व दोस्तों में बहुत लोकप्रिय थे।