एसी कोच में घुसे 8 बदमाश, कट्‌टा अड़ाकर 3 लाख लूटे, 1 घायल

होशंगाबाद

इटारसी। सोनतलाई स्टेशन के पास 12791 सिकंदराबाद-दानापुर एक्सप्रेस काे लुटेराें ने निशाना बनाया। गुरुवार-शुक्रवार रात 12.52 बजे लुटेराें ने जनरल कोच में चेन पुलिंग कर हथियारबंद 8 बदमाशों ने एसी कोच बी-4 को के 8 यात्रियाें से करीब तीन लाख रुपए की चाकू दिखाकर लूट की। विरोध करने पर यात्रियाें से मारपीट की।ट्रेन दो स्थलों पर चेन खींचकर रोकी गई। ट्रेन में देसी कट्‌टे, चाकू अाैर हथियार लेकर बदमाश चढ़े थे। ट्रेन में कोई स्क्वाड नहीं था। इसी कारण सोने के जेवर, रुपए सहित तीन लाख की लूट हो गई। पिपरिया स्टेशन अधीक्षक जगन्नाथ मीना ने बताया पिपरिया स्टेशन पर ट्रेन रात में 2:00 बजे आई। ट्रेन रूकते ही यात्रियों ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया। 

रेलवे ट्रैक के पास कपड़े, बैग मिले, खेत में पड़ा था मोबाइल:

सोनतलाई स्टेशन से डेढ़ किमी दूर खंभा नंबर 768 के पास लूट की वारदात हुई। सर्चिंग में पुलिस को घटनास्थल से एक किमी दूर खंभा नंबर 766/14 के पास रेलवे ट्रैक किनारे दो बैग, कंबल रखे मिले। वहीं कुछ दूरी पर लूटे गए मोबाइल की लोकेशन मिली। सर्चिंग में खेत में मोबाइल मिल गया। लुटेरों के जूतों के निशान मिले। दो मोबाइल फोन की लोकेशन बार-बार बदल रही। पुलिस को आशंका है कि बदमाशों ने ट्रेन में ही दो मोबाइल फेंक दिए होंगे। इस वारदात से 24 घंटे पहले ही छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में बरशाली स्टेशन पर लूटपाट की वारदात हुई। इस घटना में भी बदमाश बैग और कंबल ट्रैक किनारे छोड़ कर चले गए थे। 

विरोध किया ताे लुटेरे ने मेरे सिर पर देसी कट्टा लगा दिया :

ट्रेन रात 12.10 बजे इटारसी स्टेशन पर आई। ट्रेन में जिनका रिजर्वेशन नहीं था, उन्हें अटैंडर, टीसी ने कोच में आने दिया। 15-20 मिनट बाद ट्रेन जबलपुर रवाना हुई। रात 12.50 बजे मैं बी-4 कोच में अपनी बर्थ नंबर 55 पर चादर ओढ़े लेटकर मोबाइल में गाने सुन रहा था। अचानक ट्रेन रुक गई। चार-पांच बदमाश हमारे एसी बी-4 कोच में चढ़ गए और सामान उठाने लगे। एक बदमाश ने जैसे ही मेरी चादर हटाई, मैं घबराकर बैठ गया। विरोध करने पर बदमाश ने मेरे सिर पर देसी कट्टा लगा दिया। दूसरे बदमाशों ने मेरे हाथ के पंजें और दाएं पैर में चाकू से वार कर दिया। दाएं हाथ में पहनी सोने की अंगूठी और गले में सोने की चेन छीन ली। फिर अन्य यात्रियों का सामान भी छीना। 25 मिनट तक ट्रेन उसी जगह खड़ी रही। रात 1.15 बजे ट्रेन आगे बढ़ी कि 1.19 मिनट बजे दो बार चेन पुलिंग हुई। तीन मिनट तक वहां ट्रेन खड़ी रही। घटना के समय हमारे कोच के अटैंडर दूसरे कोच में भागकर शटर लगाने लगा। फिर टीसी व अटैंडर अाए। मदद करने की बात कही। लेकिन न डॉक्टर मिले और न पुलिस। पांच घंटे तक हाथ और पैर से खून निकलता रहा। जबलपुर पहुंचने पर इलाज मिला। ट्रेन के अंदर पुलिस जवान मौजूद नहीं था।